इस हफ़्ते 50 यूज़र इंटरव्यू लीजिए। एक भी शेड्यूल किए बिना।
HaveTheWhy एक सेल्फ़-सर्व, AI-संचालित रिसर्च है: बताइए आपको क्या जानना है, और AI इंटरव्यूअर तैयार हो जाता है। वह आपके यूज़र्स से WhatsApp, Telegram या वेब चैट पर बात करता है, और फिर जवाबों को ऐसे Snapshot में बदल देता है जिस पर फ़ैसला लिया जा सके। इंटरव्यू जितनी गहराई, सर्वे जितना स्केल।
एक्टिव बीटा में। पहला प्रोजेक्ट फ़्री — बदले में बस आपका फ़ीडबैक चाहिए।
मान लीजिए आपको जानना है कि ग्राहक क्यों छोड़ देते हैं — पहले 60 दिनों में ही।
- 01
आप लक्ष्य तय करते हैं
~5 मिनटएक लाइन — वह फ़ैसला जो आपको लेना है। आपका AI इंटरव्यूअर उसी के इर्द-गिर्द पूरी बातचीत डिज़ाइन करता है: शुरुआत, मुख्य सवाल, स्कोरिंग रूब्रिक। न स्क्रिप्ट लिखनी है, न ब्रांचिंग जोड़नी है। लाइव होने से पहले आप देखकर मंज़ूरी देते हैं। चाहें तो अतिरिक्त कॉन्टेक्स्ट अपलोड कीजिए (नॉलेज बेस, डॉक्स, पुरानी रिसर्च) ताकि इंटरव्यूअर आपके डोमेन की भाषा अच्छी तरह समझे।
- 02
लिंक आप अपनी ऑडियंस के साथ शेयर करते हैं
एक लिंक, आपके लोगो के साथ। भेजते आप हैं — ग्राहकों को ईमेल, कम्युनिटी में मैसेज, इन-ऐप प्रॉम्प्ट या पेड ऐड्स। लोग चैट को अपने ब्राउज़र में खोलते हैं, या सीधे किसी जुड़े मैसेंजर में — जैसे WhatsApp या Telegram। कुछ इंस्टॉल करने की ज़रूरत नहीं।
- 03
वे AI इंटरव्यूअर से बात करते हैं
ज़्यादातर फ़ोन पर। बोलकर या लिखकर। इंटरव्यूअर दोनों को टेक्स्ट में बदलता है, जवाब सुनकर आगे के सवाल पूछता है, और जो बात हो चुकी उसे दोबारा नहीं पूछता। गहराई आप तय करते हैं — 5 मिनट का झटपट पल्स चेक या 30 मिनट का गहरा इंटरव्यू।
- 04
आपको Snapshot मिलता है
असर के हिसाब से क्रम में लगे मुख्य निष्कर्ष, यूज़र के अपने शब्दों के साथ। पूरे रॉ ट्रांसक्रिप्ट JSON या CSV में एक्सपोर्ट कीजिए। जब चाहें तब तैयार — जवाब आने के मिनटों बाद।
न कोई कॉल शेड्यूल करनी है, न इंटरव्यूअर हायर करने हैं।
न सर्वे। न चैटबॉट। बस एक छोटी, फ़ोकस्ड बातचीत।
वे इसे पहले से इस्तेमाल करते हैं।
बातचीत WhatsApp, Telegram या वेब चैट में होती है। न इंस्टॉल, न कोई नया ऐप।
बोलें या लिखें — उनकी मर्ज़ी।
ज़्यादातर लोग बीच-बीच में दोनों बदलते रहते हैं। इंटरव्यूअर 30+ भाषाओं में आवाज़ को टेक्स्ट में बदल देता है।
गहराई सिर्फ़ वहाँ, जहाँ मायने रखती है।
न 12 पन्नों का फ़ॉर्म, न ज़रूरी फ़ील्ड्स। जो बात हो चुकी, अगला सवाल उसे जानता है। जो बात दिलचस्प थी, अगला सवाल उसका 'क्यों' पूछता है।
बीटा में कम्प्लीशन रेट फ़ॉर्म या शेड्यूल की गई कॉल के मुक़ाबले काफ़ी ज़्यादा रहती है।
एक रिपोर्ट, एक एनालिस्ट, और पूरा रॉ डेटा।
एक रास्ता है अपने-आप बना Snapshot। दूसरा है अपने डेटा से सीधी बातचीत। तीसरा है ट्रांसक्रिप्ट लेकर ख़ुद अपना एनालिसिस करना। एक इस्तेमाल कीजिए, या तीनों।
Snapshot रिपोर्ट
असर के हिसाब से क्रम में लगे मुख्य निष्कर्ष, यूज़र के अपने शब्दों के साथ। कम्प्लीशन रेट, ड्रॉप-ऑफ़ पॉइंट, रेस्पॉन्डेंट की स्ट्रक्चर्ड प्रोफ़ाइल, और आपकी तय की गई कैटेगरी पर स्कोरिंग। सब अपने-आप।
Deep Analytics Chat
एक AI एनालिस्ट जिसने हर ट्रांसक्रिप्ट पढ़ रखा है। सीधी भाषा में पूछिए: "वे सारे रेस्पॉन्डेंट दिखाओ जिनका purchase intent ज़्यादा है", "एंटरप्राइज़ लीड्स को किसने रोका", "इन्वेस्टर डेक के लिए churn पर एक सेक्शन लिख दो।"
रॉ ट्रांसक्रिप्ट
JSON या CSV में एक्सपोर्ट कीजिए। Claude Code, n8n या अपनी पाइपलाइन में डालिए। डेटा हम देते हैं, उसका क्या करना है यह आप तय कीजिए।
हर Snapshot का हर निष्कर्ष उन्हीं शब्दों से जुड़ा है जो यूज़र ने ख़ुद कहे। कोई ब्लैक बॉक्स नहीं।
इंटरव्यूअर कोई स्क्रिप्ट नहीं पढ़ रहा।वह एक साथ तीन चीज़ों पर चल रहा है।
आपका बिज़नेस लक्ष्य।
सेटअप में एक बार डालिए। इंटरव्यूअर जानता है कि आपको कौन-सा फ़ैसला लेना है — और बातचीत को उसी तरफ़ ले जाता है।
आपका डोमेन कॉन्टेक्स्ट।
एक बार डालिए। B2B SaaS कंपनी के लिए इसका मतलब है — आपके खरीदार ऑनबोर्डिंग, प्रोक्योरमेंट, रिन्युअल और इंटीग्रेशन की बात कैसे करते हैं। कंज़्यूमर ऐप के लिए शब्दावली एकदम अलग होगी। हर इंटरव्यू में अपनी इंडस्ट्री दोबारा समझाने की ज़रूरत नहीं।
यूज़र के पिछले जवाब।
उसी वक़्त पढ़े जाते हैं। जिन सवालों के जवाब मिल चुके, इंटरव्यूअर उन्हें छोड़ देता है; जो अहम है उसमें गहरा उतरता है; और बात न बने तो सवाल दोबारा अपने ढंग से पूछता है। कोई दो बातचीत एक जैसी नहीं होतीं।
इसीलिए कोई फ़ॉर्म — AI फ़ॉलो-अप वाला भी — यह नहीं कर पाता।
छह रिसर्च प्रोजेक्ट जो आज ही शुरू हो सकते हैं।
ग्राहक पहले 60 दिनों में ही क्यों छोड़ देते हैं?
- किससे
- पिछले 90 दिनों में छोड़ चुके और निष्क्रिय यूज़र्स।
- नतीजा
- 3 सबसे बड़े churn कारण, क्रम में, यूज़र के शब्दों के साथ।
- किसके लिए
- प्रोडक्ट, कस्टमर सक्सेस, रिटेंशन।
हम जो दिक्कत हल करते हैं, वह किस सेगमेंट में सबसे ज़्यादा चुभती है?
- किससे
- आपके CRM या कम्युनिटी से वे लोग जो आपकी थ्योरी पर फ़िट बैठते हैं।
- नतीजा
- हर सेगमेंट में दिक्कत कितनी बड़ी है, कितनी जल्दी हल चाहिए, बजट है या नहीं, और मौजूदा विकल्प कितने कमज़ोर हैं — इसके सबूत।
- किसके लिए
- फ़ाउंडर, शुरुआती स्टेज के PM।
नया फ़ीचर सच में चला या नहीं?
- किससे
- रोलआउट के पहले 60 दिनों वाले यूज़र्स।
- नतीजा
- क्या इस्तेमाल हुआ, क्या छोड़ा गया, अब क्या ठीक करना है।
- किसके लिए
- प्रोडक्ट, ग्रोथ।
यूज़र को फ़ायदा मिलने में देर कहाँ हो रही है?
- किससे
- पहले 30 / 60 / 90 दिनों वाले ग्राहक।
- नतीजा
- प्रोडक्ट की रुकावटें बनाम कंपनी के अंदर की रुकावटें, अलग-अलग।
- किसके लिए
- ऑनबोर्डिंग, CS, प्रोडक्ट।
हमारे AI फ़ीचर्स पर यूज़र किस हद तक भरोसा करते हैं?
- किससे
- आपके AI फ़ीचर्स के यूज़र्स (और वे भी जिन्होंने उन्हें बंद कर दिया)।
- नतीजा
- भरोसे के सेगमेंट, अपनाने में रुकावटें, और गवर्नेंस को लेकर क्या-क्या चाहिए।
- किसके लिए
- प्रोडक्ट, AI टीम लीड।
जो कुछ आप 1:1 में पूछते हैं — पूरी टीम से एक साथ।
- किससे
- आपकी अपनी टीम।
- नतीजा
- थीम, सेंटीमेंट, स्ट्रक्चर्ड प्रोफ़ाइल।
- किसके लिए
- HR, पीपल ऑप्स, फ़ाउंडर।
अपना सवाल यहाँ नहीं दिखा? टीमें HaveTheWhy को प्राइसिंग रिसर्च, मैसेज टेस्टिंग, पार्टनर डिस्कवरी और फ़ीचर प्रायोरिटाइज़ेशन के लिए भी इस्तेमाल कर चुकी हैं। प्रोजेक्ट बनाते वक़्त विज़ार्ड में बस अपना फ़ैसला लिख दीजिए — प्लेटफ़ॉर्म उसी के हिसाब से इंटरव्यूअर तैयार कर देगा।
छोटी-छोटी बातें जो डेटा बदल देती हैं।
जिस सर्वे को लोग बीच में छोड़ देते हैं और जिस बातचीत को पूरा करते हैं — फ़र्क छोटी-छोटी चीज़ों में है। हम उन्हीं पर मेहनत करते हैं।
अपने-आप फ़ॉलो-अप
जो लोग बीच में रुक जाते हैं, उन्हें हल्का-सा रिमाइंडर जाता है और वे वहीं से आगे बढ़ते हैं जहाँ छोड़ा था। कम्प्लीशन रेट बढ़ता है, और आपकी टीम को किसी के पीछे नहीं भागना पड़ता।
कोई भी भाषा, अपने-आप पहचानी गई
इंटरव्यूअर उसी भाषा में बात करता है जिसमें यूज़र ने पहला जवाब दिया — या आप हर ऑडियंस के लिए भाषा ख़ुद तय कर सकते हैं। एक स्टडी, कई बाज़ार, ट्रांसलेशन का कोई अलग स्टेप नहीं।
हमदर्दी और इंटरव्यू की समझ
इंटरव्यू लेने का तरीका पहले से बना हुआ है: खुले सवाल, ध्यान से सुनने के संकेत, और ऐसे फ़ॉलो-अप जो जवाब की तरफ़ धकेलते नहीं। लोग सच में खुलकर बोलते हैं — जैसे किसी समझदार इंसान से बात कर रहे हों।
बातचीत का अंत, लक्ष्य के हिसाब से
हर बातचीत के आख़िर में इंटरव्यूअर उस व्यक्ति की 2–3 मुख्य बातें दोहराता है और एक काम का अगला कदम सुझाता है — कंसल्टेशन, कोई रिसोर्स, या फ़ॉलो-अप कॉल।
कुछ टीमों के लिए एकदम सही। कुछ के लिए बिल्कुल नहीं।
सही है, अगर
- आपके पास पहले से ऑडियंस है: यूज़र, छोड़ चुके ग्राहक, कर्मचारी, बीटा लिस्ट, न्यूज़लेटर, CRM।
- आपको अगले 90 दिनों में प्रोडक्ट, GTM, प्राइसिंग या मैसेजिंग का फ़ैसला लेना है।
- आप 30 यूज़र इंटरव्यू करना चाहते थे, पर कैलेंडर में जगह कभी नहीं बनी।
- आपकी टीम पहले से AI टूल्स के साथ काम करती है और ऐसा रॉ डेटा चाहती है जिसका एनालिसिस वह ख़ुद कर सके।
- आपकी ऑडियंस तक ईमेल, इन-ऐप मैसेज या WhatsApp से पहुँचा जा सकता है — या आप अपने इंटरव्यू लिंक पर ऐड्स चलाने को तैयार हैं।
हम नहीं, अगर
- आपको कोल्ड पैनल से लोग चाहिए। हम रेस्पॉन्डेंट नहीं देते।
- आपको लाइव कस्टमर सपोर्ट ऑटोमेशन चाहिए। हम सवाल पूछते हैं, जवाब नहीं देते।
- आपको सिर्फ़ NPS के नंबर वाले डैशबोर्ड चाहिए।
डेटा आपका है। तरीका जाँचा जा सकता है।
आपकी ऑडियंस, आपका डेटा।
रेस्पॉन्डेंट आप लाते हैं। हम कोई डेटा न बेचते हैं, न किसी से साझा करते हैं। ट्रांसक्रिप्ट और एनालिसिस आपके वर्कस्पेस में ही रहते हैं।
हर निष्कर्ष क्लिक करके जाँचा जा सकता है।
Snapshot का हर निष्कर्ष उन्हीं शब्दों से जुड़ा है जो यूज़र ने ख़ुद कहे। कोई ब्लैक बॉक्स नहीं। कोई 'AI ने कह दिया' नहीं।
लाइव होने से पहले सब आपकी नज़र से गुज़रता है।
इंटरव्यू का फ़्लो, सवाल, स्कोरिंग रूब्रिक — पहला मैसेज किसी यूज़र तक पहुँचने से पहले सब आप देखते और मंज़ूर करते हैं।
जहाँ ज़रूरी हो, इंसान बीच में।
इंटरव्यूअर आपके तय किए लक्ष्य और रूब्रिक के अंदर ही चलता है। न मनमानी करता है, न रेस्पॉन्डेंट से मनचाहा जवाब निकलवाता है, न लोगों की कही बात से आगे बढ़कर कोई नतीजा निकालता है।
GDPR के अनुकूल सेटअप। SOC 2 पर काम जारी है। कस्टम डेटा रिटेंशन और PII हटाने की सुविधा माँगने पर उपलब्ध।
एक फ़ैसले से शुरू कीजिए। बाकी प्लेटफ़ॉर्म संभाल लेगा।
HaveTheWhy का AI इंटरव्यूअर चलता हुआ देखिए। एक छोटा फ़िट-चेक सर्वे भरिए और जान लीजिए कि यह आपके लक्ष्यों के लिए सही है या नहीं। शुरुआत के लिए 5,000 फ़्री क्रेडिट भी मिलेंगे।
- 01एक यूज़ केस। एक ऑडियंस। एक फ़ैसला।
अपनी टीम का सबसे ज़रूरी अनसुलझा सवाल चुनिए — और वह ऑडियंस जिसे आप जवाब देने के लिए बुलाएँगे। एक फ़ोकस्ड प्रोजेक्ट, पाँच बिखरे हुए प्रोजेक्ट से बेहतर है।
- 02आपका AI इंटरव्यूअर इंटरव्यू तैयार करता है। आप जाँचते हैं।
आपके लक्ष्य (और अपलोड किए कॉन्टेक्स्ट) के आधार पर वह शुरुआत, मुख्य सवाल और स्कोरिंग रूब्रिक तैयार करता है। Settings में आप सब कुछ देख और बदल सकते हैं — और अपने इंटरव्यूअर से टेस्ट चैट भी कर सकते हैं — इससे पहले कि कोई असली यूज़र मैसेज देखे।
- 03आप एक लिंक शेयर करते हैं।
उसे अपनी मौजूदा ऑडियंस को भेजिए — ग्राहकों के ईमेल, आपकी कम्युनिटी, CRM कॉन्टैक्ट — या उस पर पेड ट्रैफ़िक भेजिए। रेस्पॉन्डेंट इंटरव्यूअर से वेब चैट में या सीधे WhatsApp या Telegram में बात करते हैं, बोलकर या लिखकर — Slack, Intercom और बाकी इंटीग्रेशन जल्द आ रहे हैं। चैट को सबके लिए खुला रखिए, या सिर्फ़ अपनी ऑडियंस तक सीमित।
- 04रॉ डेटा तुरंत। इनसाइट मिनटों में।
जैसे-जैसे लोग पूरा करते हैं, ट्रांसक्रिप्ट आते जाते हैं। एनालिटिक्स जब चाहें तब, या तय संख्या में इंटरव्यू पूरे होते ही अपने-आप। कोई जवाब भेजे और उसी पल काम की चीज़ हाथ में — हफ़्ते भर की रिपोर्ट का इंतज़ार नहीं।
बीच में मदद चाहिए? बीटा के दौरान हम ख़ुशी से आपका पहला प्रोजेक्ट साथ मिलकर चलाएँगे — बस हमसे संपर्क कीजिए।
सवाल जो अक्सर पूछे जाते हैं।
नहीं। और यही सवाल हमसे सबसे ज़्यादा पूछा जाता है।
ChatGPT बातचीत में बढ़िया है, रिसर्च में कमज़ोर। वह हर बात के पीछे चल पड़ता है, लक्ष्य भूल जाता है, जवाब की तरफ़ धकेलने वाले सवाल पूछता है, और यह भी भूल जाता है कि क्या-क्या पूछा जा चुका है।
HaveTheWhy तीन चीज़ों से बँधा है: आपका डाला हुआ बिज़नेस लक्ष्य, आपकी मंज़ूर की गई स्कोरिंग रूब्रिक, और एक कवरेज मैप जो पक्का करता है कि हर रेस्पॉन्डेंट से ज़रूरी सवाल पूछे जाएँ। इंटरव्यूअर इसी दायरे के अंदर ढलता है — बाहर मनमानी नहीं करता।
कुछ करेंगे, कुछ नहीं। यह हर रिसर्च तरीके के साथ होता है।
बीटा में हमें वॉर्म लिस्ट पर 30–40% कम्प्लीशन रेट दिख रहा है — उन्हीं लोगों से फ़ॉर्म भरवाने या कॉल बुक कराने के मुक़ाबले काफ़ी ज़्यादा। कोल्ड लिस्ट पर यह तेज़ी से गिरता है, इसीलिए हम अपनी ही ऑडियंस से शुरू करने की सलाह देते हैं।
रेस्पॉन्डेंट का अनुभव एक छोटी, फ़ोकस्ड बातचीत जैसा है — नकली इंसानी इंटरव्यू जैसा नहीं। कोई अवतार नहीं, कोई "हाय, मैं सारा हूँ!" वाला नाटक नहीं। इंटरव्यूअर ख़ुद को AI बताता है, कितना समय लगेगा यह बताता है, और उसी में निपटा देता है।
वे फ़ॉर्म टूल हैं जिनमें AI फ़ीचर जोड़ दिए गए। हम रिसर्च टूल हैं जो बातचीत पर चलता है।
फ़ॉर्म वही पूछता है जो आपने लिखा। हम सवाल पूछते हैं, और फिर तब तक 'क्यों' पूछते हैं जब तक असली जवाब न मिल जाए। फ़ॉर्म में 12 फ़ील्ड होते हैं। हमारे पास एक लक्ष्य होता है और उसके इर्द-गिर्द ढलती एक बातचीत — जितनी हल्की या जितनी गहरी आप चाहें।
अगर आपका सवाल 5 फ़ील्ड के फ़ॉर्म में समा जाता है, तो फ़ॉर्म ही इस्तेमाल कीजिए। नहीं समाता, तो हमसे बात कीजिए।
आपकी ऑडियंस, आपका डेटा। आपके वर्कस्पेस से गुज़रने वाली किसी भी चीज़ को हम न बेचते हैं, न साझा करते हैं, न उस पर ट्रेनिंग करते हैं। GDPR के अनुकूल सेटअप, SOC 2 पर काम जारी, कस्टम डेटा रिटेंशन उपलब्ध।
वैसे भी पहले बीटा में हम संवेदनशील डेटा को हाथ न लगाने की सलाह देते हैं — क्वालिटेटिव रिसर्च ज़्यादातर राय, वर्कफ़्लो और रुकावटों के बारे में होती है, जो कम जोखिम वाली जानकारी है। इनसाइट की क्वालिटी साबित हो जाए, फिर इंटीग्रेशन और कम्प्लायंस पर बात कर लेंगे।
नहीं। हम रिसर्च टूल हैं, पैनल नहीं — अपनी ऑडियंस को बुलाना आपके हाथ में है, और यह जानबूझकर ऐसा रखा गया है।
HaveTheWhy वहाँ सबसे अच्छा काम करता है जहाँ जिन लोगों की बात आप सुनना चाहते हैं, उन तक आपकी पहुँच पहले से हो: यूज़र, छोड़ चुके ग्राहक, कर्मचारी, न्यूज़लेटर सब्सक्राइबर, CRM कॉन्टैक्ट, कम्युनिटी। आप अपने इंटरव्यू लिंक पर पेड ट्रैफ़िक भी भेज सकते हैं — ऐड्स या स्पॉन्सर्ड पोस्ट।
अगर आपको कोल्ड पैनल से लोग चाहिए, तो उसके लिए कोई समर्पित पैनल प्रोवाइडर सही टूल है — हम ख़ुशी से आपको सही दिशा दिखा देंगे।
नतीजा डैशबोर्ड नहीं है। यह एक फ़ैसले वाला नोट है, जिसके नीचे पूरे सबूत लगे हैं।
एक आम Snapshot कुछ ऐसा दिखता है: "3 सबसे बड़े churn कारण, क्रम में, यूज़र के शब्दों के साथ। सुझाव: पहले X ठीक कीजिए। सबूत: 24 में से 17 लोगों ने इसका ज़िक्र किया। उलटा उदाहरण: 4 एंटरप्राइज़ यूज़र्स ने नहीं किया, वजह Y।"
डैशबोर्ड वाला व्यू भी है, अगर आपको चाहिए। लेकिन असली नतीजा वह नोट है जिसे आप सच में इस्तेमाल करेंगे।
पक्का नहीं कि यह आपके काम का है? 3 मिनट में ख़ुद देख लीजिए।
HaveTheWhy का AI इंटरव्यूअर चलता हुआ देखिए। एक छोटा फ़िट-चेक सर्वे भरिए और जान लीजिए कि यह आपके लक्ष्यों के लिए सही है या नहीं। शुरुआत के लिए 5,000 फ़्री क्रेडिट भी मिलेंगे।